राज्यसभा ने कृषि सुधार के तीसरे बिल सहित सात बिलों को दी मंजूरी

राज्यसभा ने कृषि सुधार के तीसरे बिल सहित सात बिलों को दी मंजूरी

प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  • पारित बिलों में रा और रक्षा वर्दीवसिर्टी बिल 2020 भी शामिल है
  • कृषि बिल पारित होने के समय राज्यसभा में हुआ था हंगामा
  • आठ सांसदों के निलंबन के विरोध में कार्यवाही का बैकरकोट कर रहा विरोध

नई दिल्ली:

राज्यसभा में मंगलवार को 7 प्रतिबंधीयकों को मंजूरी दी गई, जिसमें भारतीय इंसटट्यूट ऑफ इंफोर्मेशन टेक्नॉलॉजी लॉ (संशोधन) बिल 2020 और एसेंशियल कमोडिटीज (अमेडमेंट बिल) 2020 (राष्ट्रीय वस्तु संशोधन विधेयक) शामिल हैं। इसके अलावा जिनबैयर्स को सदन ने मंजूरी दी, उनमें द बैंकिंग रेगुलेशन (संशोधन बिल 2020), द कंपनी (अमेंडमेंट) बिल 2020, द नेशनल फोरेंसिंक साइसेंस यूनिवर्सिर्टी बिल 2020, रास रक्षा डिफेंसिव बिल्ट 2020 और द टेक्सेशन एंड अदर लॉ बिल 2020 शामिल हैं। हैं। विपक्ष की गैरमौजूगी में उस्तच सदन ने इन बिलों को मंजूरी दी।

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गौरतलब है कि रविवार को दो कृषि बिल को पारित करने की प्रक्रिया के दौरान राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने जमकर हंमामा किया था, जिसके फलसूरत आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया था, जो कल दिन से ही संसद परिसर में धरने पर बैठे हुए हैं। राज्यसभा से सोमवार को निलंबित किए गए आठ सांसदों के निलंबन (राज्यसभा सांसद निलंबन) को वापस लेने की गुज़रों के साथ विपक्ष ने मंगलवार को राज्यसभा का बहिष्कार करने को लेकर ऐलान कर दिया है। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि जब तक इन सांसदों का निलंबन वापस नहीं लिया जाता है, विपक्षी राज्यसभा की कार्रवाई में भाग नहीं लेगा।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष आजाद ने मंगलवार को कहा कि इन निलंबित सांसदों से मुलाकात की जाएगी और इसके बाद उनकी मांगों के सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘हमने राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी की तरफ से तीन महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं: पहली मांग है कि सरकार एक नई बिल लाए जिसमें यह बात सुनिश्चित की जाए कि कोई भी प्राथमिक कंपनी एमएसपी के नीचे किसानों से कोई उपज नहीं खरीद सकती है। हमारी दूसरी मांग है कि स्वामीनाथन फॉर्मूला के तहत एमएसपी देश में तय हो। तीसरी मांग यह है कि भारत सरकार, राज्य सरकार या खाद्य कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यह सुनिश्चित करें कि किसानों से निर्धारित एमएसपी की रेट्रो पर ही उनकी उपज हो। जब तक यह तीनों माँगें नहीं मनी जातीं हम सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेंगे। ‘

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