महीनों बाद स्कूल पहुंचे बच्चों की निगेटिविटी दूर करने के लिए खाना बनाना, झाड़ू लगाना सिखा रहा स्पेन का बॉयज स्कूल, लैंगिक समानता बढ़ाना भी है मकसद

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एक घंटा पहले

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महीनों बाद स्कूल पहुंचे बच्चों की निगेटिविटी दूर करने के लिए खाना बनाना, झाड़ू लगाना सिखा रहा स्पेन का बॉयज स्कूल, लैंगिक समानता बढ़ाना भी है मकसद MediaWinii 27/02/2021

स्पेन का एक बॉयज स्कूल लड़कों को खाना बनाना, बर्तन धोना, झाड़ू लगाना और प्रेस करना सिखा रहा है। इसकी दो वजह है- पहली कोरोना काल के कारण लंबे समय बाद स्कूल पहुंचे स्टूडेंट्स की नेगेटिविटी खत्म करना। दूसरी लैंगिक समानता को बढ़ावा देना। विगो सिटी स्थित डे फीमेंटो मोंटेकालेस्टो स्कूल की इस पहल की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं।

महीनों बाद स्कूल पहुंचे बच्चों की निगेटिविटी दूर करने के लिए खाना बनाना, झाड़ू लगाना सिखा रहा स्पेन का बॉयज स्कूल, लैंगिक समानता बढ़ाना भी है मकसद MediaWinii 27/02/2021

लॉकडाउन में घर पर बंद रहने से खराब हुई मानसिक स्थिति

स्कूल के संस्थापक डैन बेकन बताते हैं कि शहर की आबादी करीब तीन लाख है। कोरोनावायरस के बाद देखो सिटी समेत पूरे देश के स्कूल बंद हो गए थे। इस दौरान लंबे समय तक स्टूडेंट्स को घरों में कैद होकर रहना पड़ा, जिससे ज्यादातर बच्चों की मानसिक स्थिति खराब हो गई। कुछ बच्चे डिप्रेशन में चले गए तो कुछ दिमाग में नकारात्मकता बैठ गई। वहीं, सितंबर में करीब 6 माह बाद जब स्कूल खुले तो कक्षाएं गुलजार हो उठीं।

महीनों बाद स्कूल पहुंचे बच्चों की निगेटिविटी दूर करने के लिए खाना बनाना, झाड़ू लगाना सिखा रहा स्पेन का बॉयज स्कूल, लैंगिक समानता बढ़ाना भी है मकसद MediaWinii 27/02/2021

लैंगिक समानता बढ़ाना भी है मकसद

स्कूल पहुंचे बच्चे जब गुमसुम नजर आए तो स्कूल प्रशासन यह फैसला किया गया कि पहले स्टूडेंट्स के मन के अंदर से नकारात्मकता खत्म की जाए। तब जाकर लड़कों को घरेलू काम सिखाना शुरू किया गया। इसके अलावा उन्हें घर पर हाथ बंटाने का भी टास्क किया गया। बच्चों ने काम के प्रति दिलचस्पी दिखाई और उनकी नेगेटिविटी खत्म होने लगी। स्कूल के टीचर डेनियल कार्ला ने कहा कि घर में बच्चे हैं तो सिर्फ लड़कियां ही घरेलू कामों में मां की मदद करती हैं। इसलिए लैंगिक समानता को देखते हुए भी यह कदम उठाया गया है, वर्तमान में स्कूल में 100 से ज्यादा लड़के आ रहे हैं।

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