जम्ममू -सीतामीर एनकाउंटर: डीएनए जांच में पुष्टि, श्रमिक ही थे सेना के हाथों मारे गए तीनों-युवक

परिजनों ने आरोप लगाया था, एनकाउंटर में मारे गए तीन युवक, श्रमिक थे (प्रतीकात्मक सिम फोटो)

खास बातें

  • जम्ममू -पसिर पुलिस ने शुक्रवार को दी यह जानकारी
  • कजिन तीनों युवक थे, लेबर के रूप में काम करते थे
  • कोर्ट ऑफ इनक्ट्री ने माना था कि एनकाउंटर में शामिल जवानों को सजा हुई थी

श्रीनगर:

जम्ममू -शरीर के शोपियां जिले में जुलाई में सेना (सेना) के हाथों कथित एनकाउंटर (जम्मू-कश्मीर एनकाउंटर) में मारे गए तीनों युवक, राजौरी के श्रमिक (मजदूर) ही थे। यह खुलासा डीएनए से हुआ है। पुलिस ने शुक्रवार को कहा कि डीएनए रिपोर्ट से इन तीनों युवकों के 20 वर्षीय अबरार, 25 वर्षीय इम्तियाज, और 17 वर्षीय इब्रम अहमद होने की बात सामने आई है। ये तीनों कजिन थे और लेबर के तौर पर काम करते थे। सेना के जवानों ने इंसेन आतंककी ‘बताया’ था और उनके किराए के घर में घुस गए और बाद में मौत के घाट उतार दिया था।

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सेना की ओर से कोर्ट ऑफ इनक्वाइटी (कोर्ट ऑफ इंक्वायरी) ने पहले ही इस ‘विवादित’ एनकाउंटर (विवादास्पद मुठभेड़) में शामिल जवानों को दोषी माना है। जांच में पाया गया है कि सैनिकों ने आर्म्ड फोर्सेस एक्ट के तहत मिले अधिकारों का उल्लीलिंग किया। जांच में प्रथम दृष्‍टया पाया गया था कि जवानों ने AFSPA 1990 की शक्तियों का दुरुपयोग किया और सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों की अवेना हुई। ‘ गौरतलब है कि एनकाउंटर के बाद के इन तीनों युवकों के सोशल मीडिया पर फोटो आने के बाद विवाद गहरा गया था। परिवार ने इनकी पहचान तीन कजिन के रूप में की थी जिसे 17 जुलाई से संपर्क नहीं हो पा रहा था। विवाद के बाद सेना और पुलिस की ओर से कहा गया था कि वे मामले की जांच करेंगे।

उस समय क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने NDTV को बताया था कि पुलिस और सेना की ओर से उनहें डेड बॉडी की पहचान के लिए बुलाया गया था, लेकिन समें से कोई भी स्थापितणीय नहीं पाया गया था। एनकाउंटर के उपकरणों से लगभग 100 मीटर दूर रहने वाले ग्रामीण मोहम्मदमद अशरफ ने बताया, ‘हमें शवों की पहचान के लिए बुलाया गया था, लेकिन हम ऐसा नहीं कर पाए थे क्योंकि वे बेचैन नहीं थे। उनके चेहरे, आंखों और छाती में गोली लगने के लक्ष्य थे। ‘ डीएनए प्रोफाइलिंग (डीएनए प्रोफाइलिंग) में देर को लेकर भी पुलिस की भूमिका और उसकी जांच के तरीकों को लेकर आलोचना झेलनी पड़ी थी। परिवार के डीएनए सैंपल 13 अगस्ट को के लिए गए थे और इसके परिणाम को सामूहिक करने में 43 दिन का समय लग गया। मारे गए युवकों के परिजनों ने आरोप लगाया था कि मामले में लीपापोती की कोश्शि की जा रही है।

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