इस्लामाबाद में मंदिर बनाने की आवाज हुई बुलंद, हिंदुओं ने दिया यूएई का हवाला

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

Up to date Wed, 23 Sep 2020 04:42 AM IST

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पाकिस्तान में एक बार फिर हिंदू मंदिर बनाने की आवाज बुलंद होने लगी है। इसके लिए लामबंदी की तैयारी हो रही है। पहले भी हिंदू मंदिर बनने की पहल हुई थी, लेकिन इसे लेकर काफी विवाद हो गया था। बाद में सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था। वहां की सरकार के जमीन देने के बाद वहां के इस्लामिक संगठनों ने फतवा जारी कर दिया था।

अब फिर से हिंदू मंदिर बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है, इसके लिए कई हिंदू संगठन लामबंदी की तैयारी में जुट गए हैं। साथ ही पाकिस्तान हिंदू परिषद के सदस्यों ने कहा कि हिंदू समुदाय की जरूरी चीजें जैसे श्मशान और मंदिर की स्थापना का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

बता दें पाकिस्तान एक मुस्लिम देश है, वहां कई नामी मुस्लिम मौलवी हमेशा मंदिर निर्माण का विरोध करते हैं। निर्माण को लेकर यहां खासा विवाद और हिंसा की वारदातें भी हुई हैं।

यूएई मंदिर बन सकता है तो पाकिस्तान में क्यों नहीं

कट्टरपंथियों पर निशाना साधते हुए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के एमएनए लाल चंद मल्ही ने कहा कि मंदिर का विरोध करने वाले कह रहे हैं कि मुस्लिम करदाताओं का पैसा मंदिर में लगाया जाए, तो क्या पाकिस्तान में हिंदू कर नहीं देते क्या। हम भी इस देश में करदाता हैं, अरबों रुपये राष्ट्रीय के लिए जोड़ते हैं।

 

उन्होंने कहा कि पिछले 70 सालों से सरकारों ने मंदिर के लिए एक भी पैसा खर्च नहीं किया। पाकिस्तान इस्लामिक देश है तो यूएई भी इस्लामिक राज्य है, जब वहां मंदिर बन सकता है तो पाकिस्तान में क्यों नहीं? 

 

पाकिस्तान में एक बार फिर हिंदू मंदिर बनाने की आवाज बुलंद होने लगी है। इसके लिए लामबंदी की तैयारी हो रही है। पहले भी हिंदू मंदिर बनने की पहल हुई थी, लेकिन इसे लेकर काफी विवाद हो गया था। बाद में सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था। वहां की सरकार के जमीन देने के बाद वहां के इस्लामिक संगठनों ने फतवा जारी कर दिया था।

अब फिर से हिंदू मंदिर बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है, इसके लिए कई हिंदू संगठन लामबंदी की तैयारी में जुट गए हैं। साथ ही पाकिस्तान हिंदू परिषद के सदस्यों ने कहा कि हिंदू समुदाय की जरूरी चीजें जैसे श्मशान और मंदिर की स्थापना का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

बता दें पाकिस्तान एक मुस्लिम देश है, वहां कई नामी मुस्लिम मौलवी हमेशा मंदिर निर्माण का विरोध करते हैं। निर्माण को लेकर यहां खासा विवाद और हिंसा की वारदातें भी हुई हैं।

यूएई मंदिर बन सकता है तो पाकिस्तान में क्यों नहीं
कट्टरपंथियों पर निशाना साधते हुए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के एमएनए लाल चंद मल्ही ने कहा कि मंदिर का विरोध करने वाले कह रहे हैं कि मुस्लिम करदाताओं का पैसा मंदिर में लगाया जाए, तो क्या पाकिस्तान में हिंदू कर नहीं देते क्या। हम भी इस देश में करदाता हैं, अरबों रुपये राष्ट्रीय के लिए जोड़ते हैं।
 
उन्होंने कहा कि पिछले 70 सालों से सरकारों ने मंदिर के लिए एक भी पैसा खर्च नहीं किया। पाकिस्तान इस्लामिक देश है तो यूएई भी इस्लामिक राज्य है, जब वहां मंदिर बन सकता है तो पाकिस्तान में क्यों नहीं? 
 

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